अमेरिका और ईरान के बीच शांति के प्रयास फिलहाल कामयाब नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने जल्द समझौते के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो अमेरिका बड़े सैन्य हमले के लिए तैयार है। हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है। और कतर, सऊदी अरब और यूएई के अनुरोध पर फिलहाल ईरान पर नए हमले की योजना रोक दी है।
खाड़ी देशों के कहने पर अमिरका ने रोका हमला?
ट्रंप ने सोमवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह घोषणा की जिसमें उन्होंने अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा, ”कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मुझसे ईरान पर होने वाले हमारे सुनियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने का अनुरोध किया है।”
ईरान को कोई रियायत नहीं देगा अमेरिका
वहीं न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि अमेरिका ईरान को कोई रियायत देने के लिए तैयार नहीं है। इस्लामी शासन अच्छी तरह से यह जानता है कि आगे क्या होनेवाला है। उन्होंने कहा कि ईरान पहले से कही ज्यादा समझौते के लिए उत्सुक है क्योंकि उसे अमेरिकी कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा है।
ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के ईरानी सुरक्षा एक्सपर्ट हामिदरेजा अजीजी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ईरान को इस बात की आशंका थी कि अमेरिका हमले कर सकता है। इसलिए 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरान लंबे संघर्ष की तैयारी में था। इसलिए उसने इजरायल और क्षेत्रीय टारगेट पर ड्रोन और मिसाइल हमले को सीमित रखा ताकि गोला-बारूद बचाया जा सके। अजीजी के मुताबिक अगर युद्ध फिर भड़कता है तो तेहरान छोटी अवधि लेकिन अत्यधिक तीव्रता वाले संघर्ष की उम्मीद कर रहा है।
रोजाना सैकड़ों मिसाइलें दाग सकता है ईरान
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए दौर के युद्ध में ईरान रोजाना सैकड़ों मिसाइलें खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर दाग सकता है। अरब देशों के तेल क्षेत्रों, रिफाइनरियों और बंदरगाहों को निशाना बनाना वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और ट्रंप प्रशासन पर प्रेशर बनाने का सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है। ईरान के डिफेंस एक्सपर्ट और सरकार के सपोर्टर द्वारा मीडिया में यूएई के खिलाफ जारी धमकियां इस रणनीति को उजागर करती हैं। ईरान का आरोप है कि यूएई और सऊदी अरब ने युद्ध के दौरान गुप्त रूप से उस पर हमले किए थे।
ईरान पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना कंट्रोल रखता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध बढ़ने पर तेहरान बाब-अल-मंडेब पर भी नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकता है। इस रूट से होकर विश्व व्यापार का दसवां हिस्सा गुजरता है। वहीं यमन में ईरान समर्थित हूती मिलिशिया पहले से ही इस क्षेत्र में एक्टिव हैं। इसके अलावा तेहरान में भी आम लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। आनेवाले दिनों में होनेवाली घटनाएं न केवल मध्य पूर्व की सुरक्षा बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।



