एमसीबी : किसान का जीवन उम्मीद, मेहनत और प्रकृति के भरोसे चलता है। हर मौसम उसके लिए नई चुनौतियां और नए सपने लेकर आता है। ग्राम पोंड़ीडीह का निवासी रोमन लाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां संघर्षों के बीच समय पर मिली सहायता ने उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटा दी है।करीब 0.300 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खेती करने वाले रोमन लाल के लिए खेती केवल आय का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार के जीवन का आधार है। खेतों की हरियाली से ही घर का चूल्हा जलता है, बच्चों की जरूरतें पूरी होती हैं और भविष्य के सपने आकार लेते हैं। लेकिन हर वर्ष खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद और बीज की व्यवस्था उनके लिए चिंता का कारण बन जाती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कई बार उन्हें यह सोचकर रातें जागकर बितानी पड़ती थीं कि खेती की शुरुआत कैसे होगी।
इस वर्ष भी ऐसी ही चिंता उनके मन में थी, लेकिन आदिम जाति सेवा सहकारी समिति खड़गवां, ने उनकी इस चिंता को उम्मीद में बदल दिया। समिति के माध्यम से उन्हें समय पर यूरिया, डीएपी, पोटाश और प्रमाणित धान बीज उपलब्ध कराए गए। जैसे ही आवश्यक कृषि सामग्री मिली, उनके चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास की चमक लौट आई। रोमन लाल भावुक होकर बताते हैं कि पहले खेती के मौसम में खाद-बीज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। कभी महंगे दामों पर खरीदना पड़ता, तो कभी उधार का सहारा लेना पड़ता था। इससे आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। लेकिन इस बार समय पर मिली सहायता ने उन्हें न केवल राहत दी, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि शासन और सहकारी संस्थाएं किसानों के साथ खड़ी हैं।
वे कहते हैं, “जब समय पर खाद और बीज मिल गया, तब लगा कि इस बार खेती अच्छी होगी। अब बुआई की पूरी तैयारी हो चुकी है। अच्छी फसल होगी तो घर की जरूरतें भी पूरी होंगी और बच्चों का भविष्य भी बेहतर बनेगा।“ रोमन लाल के लिए यह सहायता केवल कृषि सामग्री प्राप्त करना भर नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार के सपनों को संबल देने वाली पहल है। अब वे पूरे उत्साह के साथ खेतों में काम कर रहे हैं और अच्छी बारिश के साथ भरपूर पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं। उनके मन में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि मेहनत का फल अवश्य मिलेगा।
वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी योजनाओं और सहकारी व्यवस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहता हैं कि ऐसी पहले छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी सहारे से कम नहीं हैं। समय पर मिलने वाली सुविधाएं किसानों को आर्थिक चिंता से मुक्त कर खेती पर पूरा ध्यान केंद्रित करने का अवसर देते हैं।
रोमन लाल की कहानी बताती है कि शासन की योजनाएं जब संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधाएं नहीं देती, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास, सम्मान और उम्मीद का संचार करती हैं। आज उनके खेतों में बोए जाने वाले बीज केवल फसल के नहीं, बल्कि खुशहाल भविष्य, आत्मनिर्भरता और नए सपनों के बीज हैं, जो आने वाले समय में उनके परिवार के जीवन को समृद्धि की नई राह दिखाएंगे।



