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संकट की घड़ी में बना प्रशासन सहाराः मृतक परिवार को 24 घंटे में 4.25 लाख की सहायता ’ कलेक्टर ने घायलों से की मुलाकात, घायलों के बेहतर उपचार के दिए निर्देश’

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सुरेश मिनोचा एमसीबी : विकासखंड भरतपुर के ग्राम चरखर में मनरेगा योजना अंतर्गत बोल्डर चेकडैम निर्माण कार्य के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से हुई दुखद घटना के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संवेदनशीलता का परिचय देते हुए राहत एवं उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की है। बुधवार को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की तथा उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।उल्लेखनीय है कि 02 जून 2026, मंगलवार शाम को मनरेगा कार्य के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से ग्राम चरखर निवासी सुशीला बाई, पति गेन्दलाल सिंह की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, जबकि पांच श्रमिक घायल हो गए थे।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने आवश्यक कार्यवाही करते हुए मृतिका के परिजनों को प्राकृतिक आपदा प्रबंधन मद से 4 लाख रुपये तथा मनरेगा मद से 25 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की। इस प्रकार परिवार को कुल 4 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।बुधवार को जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने उपचाररत घायलों लक्ष्मी सिंह, मायावती सिंह, कलावती सिंह और रामबाई से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने घायलों को फल भेंट कर शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। वहीं गंभीर रूप से घायल सुभद्रा सिंह को बेहतर उपचार के लिए अन्यत्र रेफर किया गया है।

कलेक्टर ने खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमन सिंह को निर्देशित किया कि सभी घायलों को आवश्यक उपचार, दवाइयां एवं चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए तथा उनके स्वास्थ्य की सतत निगरानी रखी जाए। खंड चिकित्सा अधिकारी ने कलेक्टर को जानकारी दी कि सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है। चिकित्सकीय निगरानी के तहत उन्हें एक-दो दिन ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा, जिसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर डिस्चार्ज किया जाएगा।

कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने कहा कि संकट की इस घड़ी में जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों और घायलों के साथ खड़ा है। शासन की मंशा के अनुरूप हर संभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
जिला प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितैषी प्रशासन की कार्यशैली को सामने रखा है, जहां आपदा की घड़ी में राहत और उपचार दोनों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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