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मंदिर की पहली सीढ़ी छूकर ही क्यों करते हैं प्रवेश? जानिए इसके पीछे का आध्यात्मिक रहस्य

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 किसी भी मंदिर में प्रवेश करने से पहले ऐसे कई नियम होते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। इन नियमों में जूते-चप्पल को उतारने से लेकर हाथ पैर धोन और सिर को ढकना शामिल है। लेकिन इन सभी नियमों को मानने के बाद जब कोई व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करता है, तो अक्सर मंदिर की पहली सीढ़ी को स्पर्श करता है।

मंदिर में जाने से पहले सीढ़ियों को छूना सिर्फ एक परंपरा ही नहीं, बल्कि आस्था के नजरिए से भी बेहद खास है। आइए जानते हैं इस प्रथा को निभाने के पीछे का असल कारण और आध्यात्मिक महत्व क्या है?

मंदिर परिसर में सीढ़ियों को छूने का आध्यात्मिक महत्वहिंदू धर्म के अनुसार, मंदिर एक ऐसा स्थान है, जो पवित्र होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि, आपका शरीर, मन और भावना पूरी तरह से शुद्ध और भक्तिभाव से परिपूर्ण हो। जब कोई व्यक्ति मंदिर के अंदर जाने से पहले पहली सीढ़ी को छूता है, तो यह ईश्वरीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर में पहली सीढ़ी को प्रणाम करने का मतलब है कि, आप पूरी तरह से नकारात्मक ऊर्जा को पीछे छोड़कर मंदिर परिसर में जाने के लिए तैयार हैं। सीढ़ियों को झूककर छूना इस बात का प्रतीक है कि, वह ईश्वर के सामने अपना सारा अहंकार और गुस्सा त्याग कर जा रहा है। मंदिर में सीढ़ियों को छूना आत्मसमर्पण का भाव भी दर्शाता है। इसके साथ ही मंदिर की पहली सीढ़ी भगवान से जुड़ी होती है, जहां देवता वास करते हैं।

मंदिर की सीढ़ियों से जुड़ा अन्य रहस्यइसके साथ ही प्राचीन परंपराओं में यह भी देखने को मिलता है कि, अक्सर लोग मंदिर से बाहर निकलने के बाद मंदिर परिसर की सीढ़ियों पर जाकर बैठते हैं। कई लोगों को यह भले ही दिखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरा रहस्य छिपा है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मंदिर के शिखर को देव विग्रह का मुख भाग और उसकी सीढ़ियों को चरण का हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि, अक्सर लोग शिखर दर्शन के बाद सीढ़ियों पर जाकर बैठते हैं।

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