ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आज देव स्नान पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है. इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 पवित्र कलश के जल से महास्नान कराया जाता है. यह अनुष्ठान विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत का पहला और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है. मान्यता है कि इस शाही स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं. इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन भी नहीं होते हैं. आइए जानते हैं देव स्नान पूर्णिमा की इस अनोखी परंपरा का धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी खास बातों के बारे में.
देव स्नान पूर्णिमा का क्या है महत्व:- ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली देव स्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ के वार्षिक अभिषेक का दिन माना जाता है. इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष स्नान मंडप पर विराजमान किया जाता है. इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 पवित्र कलश के जल से उनका शाही स्नान कराया जाता है. मान्यता है कि इसी महास्नान के साथ रथ यात्रा महोत्सव की धार्मिक प्रक्रियाओं की शुरुआत हो जाती है.
108 कलश से ही क्यों कराया जाता है स्नान:- हिंदू धर्म में 108 अंक को बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है. जपमाला के 108 मनके हों, 108 उपनिषद हों या 108 दिव्य नाम इस संख्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. इसी कारण भगवान जगन्नाथ के अभिषेक में भी 108 कलश का उपयोग किया जाता है. इन कलश में भरा गया जल मंदिर परिसर के उत्तर दिशा में स्थित सोने के कुएं से लाया जाता है. परंपरा के अनुसार यह कुआं पूरे साल बंद रहता है और केवल देव स्नान पूर्णिमा के दिन ही खोला जाता है.
अनसर काल क्या होता है:- महास्नान के बाद शुरू होने वाले 15 दिनों को अनसर काल कहा जाता है. इस अवधि में भगवान के दर्शन नहीं होते. मान्यता है कि जैसे किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल की जाती है, वैसे ही भगवान की भी विशेष सेवा और उपचार किया जाता है.जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, तब उन्हें नवयौवन वेश में भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं. इसके बाद वे भव्य रथ यात्रा में नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं.
कब शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा:- देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान 15 दिनों तक विश्राम करेंगे. इसके बाद नवयौवन दर्शन होंगे और फिर 16 जुलाई 2026 से विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ होगा. यह यात्रा 24 जुलाई 2026 तक चलेगी. इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं.



