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आरएसएस के विरोध के कारण आदिवासी मुख्यमंत्री अपने समाज का उत्सव नहीं मना पा रहे : जनक ध्रुव

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 गरियाबंद :– विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी समाज की अस्मिता और संस्कृति के विरोध का आरोप लगाया है।बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने स्थानीय रेस्ट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा आदिवासी विरोधी है। 9 अगस्त को पूरी दुनिया में आदिवासी समाज ने विश्व आदिवासी दिवस मनाया, लेकिन भाजपा के किसी नेता, यहां तक कि आदिवासी नेताओं, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की ओर से भी आदिवासी समाज के लिए बधाई संदेश नहीं आया।पत्रकार वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा,रमेश शर्मा छगन यादव और नीरज ठाकुर,पवन सोनकर सुनील तिवारी,रमेश वर्मा सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि वर्ष 2023 के पहले भाजपा के नेता भी विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते थे,लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार द्वारा शासकीय स्तर पर विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस आदिवासियों की संस्कृति और अस्मिता को नष्ट कर उन्हें ‘वनवासी’ की पहचान देने पर तुली हुई है। इसी कारण विश्व आदिवासी दिवस का विरोध किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और सभ्यता को दुनिया के सामने रखने का अवसर है। आदिवासी संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन और मौलिक संस्कृतियों में से एक है। जिस छत्तीसगढ़ में करीब 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समाज की है और जहां प्राचीन आदिवासी सभ्यताओं की समृद्ध परंपरा मौजूद है, वहां सरकार द्वारा विश्व आदिवासी दिवस को शासकीय स्तर पर नहीं मनाना आदिवासी समाज का अपमान है।
जनक ध्रुव ने कहा कि आरएसएस आदिवासी संस्कृति को स्वतंत्र सभ्यता के रूप में स्वीकार करने का विरोध करती है।आदिवासी समाज को आज भी पिछलग्गू बनाकर रखने की मानसिकता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने एक आदिवासी को मुख्यमंत्री तो बना दिया, लेकिन उन्हें अपने ही आदिवासी भाई-बहनों के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाने से भी रोक रही है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को भाजपा केवल वोट बैंक के रूप में देखती है। विश्व आदिवासी दिवस का विरोध कर भाजपा ने आदिवासियों और उनकी संस्कृति के प्रति अपना रवैया स्पष्ट कर दिया है। इसे छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज भूलेगा नहीं।

जल,जंगल,जमीन ही आदिवासी समाज की पहचान,विधायक ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस हमें अपनी जड़ों को याद करने और उन पर गर्व करने का दिन है। आदिवासी समाज ने सदियों से जल, जंगल,जमीन,प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन बनाकर रखा है। जंगल उनके लिए केवल लकड़ी,नदी केवल पानी और जमीन केवल संपत्ति नहीं है।जंगल उनका जीवन,जल उनकी सांस,जमीन उनकी पहचान और संस्कृति उनकी आत्मा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा, कांकेर, नारायणपुर,दंतेवाड़ा,बीजापुर,सुकमा,कोरबा, जशपुर,बलरामपुर और गरियाबंद के वनांचलों तक आदिवासी समाज ने अपनी मेहनत, संस्कृति और संघर्ष से छत्तीसगढ़ की पहचान बनाई है। आदिवासी संस्कृति के बिना छत्तीसगढ़ की पहचान अधूरी है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता, अधिकार और जल-जंगल-जमीन के अधिकार से कोई समझौता नहीं होगा। भाजपा और आरएसएस भले ही विश्व आदिवासी दिवस का विरोध करें, लेकिन आदिवासी समाज इसे गर्व से मनाता रहा है और आगे भी मनाता रहेगा।

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