गरियाबंद : गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित तौर पर बिना वैध डिग्री के मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मेडिकल स्टोर में मौजूद एक व्यक्ति पहले मरीज के लिए दवा निकालता और इसके बाद मेडिकल के पीछे बने कमरे में जाकर उसे इंजेक्शन लगाता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच की बात कही है।

वायरल वीडियो में ‘धनेश्वर मेडिकल’ नाम से संचालित दुकान दिखाई दे रही है। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल पर बात करते हुए दवा निकालता नजर आता है। इसके बाद वह इंजेक्शन लेकर मेडिकल स्टोर के पीछे बने क्लिनिकनुमा कमरे में जाता है और वहां कथित तौर पर मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला अमलीपदर थाना क्षेत्र के सरनाबहाल का बताया जा रहा है। वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान धोबलेश्वर यादव के रूप में बताई गई है।

बिना डिग्री इलाज करने का दावा, जांच के बाद होगा खुलासा

मामले को लेकर दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति के पास फार्मेसी या नर्सिंग से जुड़ी आवश्यक वैध योग्यता नहीं है। ऐसे में मेडिकल स्टोर से दवा बिक्री के साथ मरीजों का उपचार किए जाने का आरोप स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। विभाग ने वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मेडिकल स्टोर की जांच कराने की बात कही है।

ड्रग इंस्पेक्टर बोले- बनेगी संयुक्त जांच कमेटी

मामले में ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर ध्रुबे ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी विभाग को मिली है। मेडिकल स्टोर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि वीडियो में इलाज किए जाने की बात सामने आ रही है, इसलिए इसमें नर्सिंग एक्ट से जुड़े पहलुओं की भी जांच आवश्यक है।

ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक, इस संबंध में सीएमएचओ को अवगत कराया जाएगा और संयुक्त जांच कमेटी बनाई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर, ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी पर सवाल

जानकारी के अनुसार, गरियाबंद जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें लगभग 60 मेडिकल स्टोर देवभोग और मैनपुर क्षेत्र में बताए जा रहे हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में कुछ मेडिकल स्टोरों पर कथित तौर पर दवा बेचने के साथ उपचार किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि कुछ मेडिकल स्टोरों में आवश्यक फार्मासिस्ट की मौजूदगी महज कागजों तक सीमित रहती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए विभागीय जांच जरूरी है।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी के बीच झोलाछाप इलाज का आरोप

अमलीपदर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिले चार साल से अधिक समय हो चुका है। क्षेत्र के करीब 70 गांवों और लगभग एक लाख की आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इस केंद्र पर निर्भरता बताई जाती है। क्षेत्र में दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 34 उपस्वास्थ्य केंद्र भी हैं, लेकिन कई पद लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सकीय स्टाफ की कमी के बीच कथित झोलाछाप उपचार का नेटवर्क बढ़ने की शिकायतें चिंता का विषय हैं। ऐसे में वायरल वीडियो के बाद अब जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी कि मेडिकल स्टोर में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है।

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