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ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष बेहद शुभ, शिववास में करें महादेव की अर्चना,जानें तिथि और पूजा विधि?

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माना जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत बेहतरीन साधन है. हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में. फिलहाल जेठ महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस महीने का पहला प्रदोष व्रत बेहद शुभ माना जा रहा है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. इस साल 24 मई को जेठ महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का अभिषेक करने और राम नाम लिखकर शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण करने से बड़े से बड़े संकट समाप्त हो जाते हैं और भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है.

इस दिन शुरू होगी त्रयोदशी तिथि
त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 24 मई शाम 06:43 बजे से हो रही है और समापन अगले दिन 25 मई दोपहर 03:12 बजे हो रहा है. चूंकि, त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक) में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, इसलिए 24 मई को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

प्रदोष के दिन बन दुर्लभ संयोग
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस साल जेठ माह के पहले प्रदोष व्रत के दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन शनिवार होने के कारण शनि प्रदोष व्रत रहेगा. साथ ही इस दिन शिववास भी रहेगा. जिस दिन शिववास होता है, उस दिन नदी के किनारे बैठकर भगवान शिव स्वयं धरती पर विचरण करते हैं. इसलिए जेठ माह के पहले प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है.

प्रदोष व्रत के दिन करें ये कार्य
प्रदोष व्रत के दिन यदि जातक प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती का रुद्राभिषेक करें और षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना के लिए पंचोपचार मंत्र का जाप करें, तो बड़े से बड़ा कष्ट या संकट समाप्त हो जाएगा और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ेगी.

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