
23 मई 2025:- वट सावित्री का व्रत हिन्दू धर्म का बहुत अहम पर्वों में से एक है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं. माना जाता है कि वट वृक्ष में भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी का वास होता है. वट वृक्ष की पूजा करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है. वहीं, इस साल वट सावित्री व्रत और पूजा को लेकर थोड़ी उलझन की स्थिति बनी हुई है कि व्रत किस दिन रखा जाए और पूजा किस दिन की जाए.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
वट वृक्ष की पूजा हर साल ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को की जाती है. वहीं ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, प्रदोष युक्त अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है और उदयतिथि युक्त अमावस्या को वट वृक्ष की पूजा की जाती है. इस साल प्रदोष युक्त अमावस्या 26 मई को है, तो उसी दिन व्रत रखा जाएगा. इसके साथ ही 27 मई को उदयतिथि अमावस्या है, तो उस दिन भी वट वृक्ष की पूजा करना ठीक रहेगा
क्या है पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य आगे बताते हैं कि व्रत के दिन पूरा दिन फलाहार या बिना पानी के व्रत रखा जा सकता है. वहीं, दूसरे दिन लाल कपड़े पहनकर वट वृक्ष के पास जाएं. जल चढ़ाएं, फूल, धूप और मिठाई से पूजा करें. इसके बाद लाल सूत को वट वृक्ष पर 108 बार लपेटें और हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना के लिए वट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें.



