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नीलकंठ कंपनी के कैंप में घुस कर मारपीट करने वाले 30 लोगों के खिलाफ FIR, 5 को भेजा जेल

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कोरबा: नीलकंठ कंपनी के कैंप में घुस कर मारपीट करने वाले 30 लोगों के विरुद्ध पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। नामजद पांच लोगों को जेल भेज दिया गया है। मारपीट से भागे मजदूर धीरे- धीरे लौट रहे। खदान में कंपनी ने अपना काम पुन: शुरू कर दिया है।

बता दें कि साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा परियोजना में कोयला एवं मिट्टी निकासी काम में नियोजित नीलकंठ इन्फा माइनिंग लिमिटेड कंपनी ने अपने मजदूरों को रखने के लिए पृथक से कैंप बनाया है। शनिवार की सुबह नीलकंठ कर्मचारी अपने कंपनी आवास में सो रहे थे, तभी छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना एवं अन्य से जुड़े 50 से भी अधिक लोग बिना अनुमति सिक्योरिटी गेट पर आकर गाली एवं धमकी देने लगे। आरोपी जबरन गेट तोड़ कर अंदर घुस गए।

इसके साथ ही वहां सो रहे मजदूरों के साथ मारपीट कर भगाने लगे। एकाएक हुए इस हमले से वहां उपस्थित मजदूरों में हड़कंप मच गया और सामान लेकर बाहर भाग निकले। सूचना पर सर्वमंगला पुलिस सहायता केंद्र से पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में पुलिस बल आने पर 30 से भी अधिक लोगों हिरासत में लेकर पहले कुसमुंडा थाना ले गए। वहां से बस में भर कर सभी को दर्री थाना ले गए।

5 नामजद आरोपियों को भेजा जेलपुलिस ने बताया कि नामजद गोविंदा सारथी, विजय सिंह, मु्न्ना प्रसाद, कैलाश सिंह तथा संजय सिंह को जेल भेज दिया गया है। वहीं अन्य लोगों को मुचलके पर रिहा कर दिया किया गया। कुसमुंडा थाना प्रभारी युवराज सिंह ने बताया कि लगभग 30 लोगों के विरूद्ध मारपीट, बलवा, प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। फुटेज के आधार पर जल्द ही इस मामले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी।

मारपीट के डर से भागे कंपनी के मजदूर धीरे- धीरे लौट रहे है। शनिवार को कंपनी का काम पूरी तरह बंद था, पर रविवार को काम पुन: शुरू हो गया। इससे कंपनी एवं एसईसीएल प्रबंधन ने राहत की सांस ली है।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना का आरोपयहां बताना होगा कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना का आरोप है कि नीलकंठ कंपनी द्वारा बाहर से मजदूर लाकर काम पर रखा जा रहा है, वहीं स्थानीय बेरोजगारों की उपेक्षा की जा रही है। समझौते के मुताबिक 70 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों को काम पर रखना है। जबकि शेष 30 प्रतिशत मजदूर कंपनी अपने लोगों को काम पर रख सकती है, पर यहां इसका पालन नहीं किया जा रहा।

इसकी वजह से आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। वहीं कंपनी का कहना है कि नियम का पालन पूरी किया जा रहा है और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर काम पर रखा गया है।

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