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समितियों में धान आवक बढ़ने के साथ टोकन कटाने किसानों की लगी क़तार

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन ने किसानों से धान खरीदने टोकन एप सुविधा की इंतजामात कराई है बाद इसके आन लाइन टोकन नहीं कटने की स्थिति में किसान अपने समीप के समितियों में जाकर टोकन कटाने के कतार में खड़े नजर आने लगे हैं। दरअसल समितियों में बमफर धान की आवक होने लगी है जिससे तिथि वार टोकन कटाने में किसानो को परेशानी हो रही है कि आनलाइन साईट में जाकर किसान टोकन कटा लेते हैं साईट भर जाता है।

साईट खुलने बंद होने की व्यवस्था सही नहीं है। क्षणिक पल के लिए साईट खुलती हैं और दूसरे पल बंद हो जाती है। जिससे टोकन नहीं कट पाता जबकि 70 फिसदी टोकन आन लाइन कटाने की व्यवस्था सूबे के सरकार द्वारा किया गया है। कुछ किसानो का कहना है पहुंच पकड़ वाले बड़े किसानों के टोकन तो किसी तरह कट जा रहे हैं लेकिन छोटे सीमांत किसानों को टोकन कटाने में दिक्कत हो रही है। हालांकि धान खरीदी का समय सीमा अभी बाकी है। लखनपुर ब्लाक क्षेत्र में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति द्वारा बनाए गये लखनपुर चांदो, निम्हा, अमलभिठ्ठी, लहपटरा जमगला कुन्नी पुहपुटरा लोसगा उपार्जन केन्द्रों में पंजीकृत किसानो को आन लाइन टोकन कटाने के लिए दिन सप्ताह पखवाड़े महिने का इंतजार करना पड़ रहा है।

रकबा सुधार कराने की परेशानी से अब भी बाहर नहीं निकल पाये है।बाद अब टोकन कटाने की फजीहत किसानों के सामने आ खड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का कहना है जिनको आनलाइन टोकन कटाने के नियम मालूम है ऐसे किसान तो अपने टोकन घर बैठे काट ले रहे हैं और अपना धान समितियों में बेच रहे हैं लेकिन जो किसान आन लाइन टोकन कटाने के नियम से अंजान है उन्हें समझने में काफी दिक्कत हो रही है। अन्नदाता अपने समिति के ख़ाक छानते फिर रहे हैं। इन सभी अव्यवस्थाओं को देखते हुये किसानों का कहना है कि आन लाइन टोकन कटाने की सिस्टम को बेहतर तरीके से चुस्त दुरुस्त कि जाये ताकि सरकार द्वारा बनाये गये नियम का सुचारू ढंग से परिपालन हो और अन्न दाताओं को किसी प्रकार की परेशानी उठानी न पड़े।

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