
सुरेश मिनोचा मनेन्द्रगढ़ : पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शरण सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार के बजट 2026 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आंकड़ों की बाजीगरी और जनविरोधी दस्तावेज बताया है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राज्य गठन के समय से अब तक बजट में लगभग 35 गुना वृद्धि होकर यह 5000 करोड़ से बढ़कर 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपयों तक पहुंच गया है लेकिन आम जनता के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता।उन्होंने कहा कि अस्पताल तो बनाये गये हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। कॉलेज खुले हैं पर प्रोफेसरों के पद खाली हैं। सैकड़ों स्कूल बंद हो गये जबकि शराब दुकानों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षित राज्य बनाने के बजाय प्रदेश को शराबी राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
शरण सिंह ने कहा कि बजट में किसानों को केवल लॉलीपॉप दिया गया है। बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों पर कोई ठोस अनुदान या राहत नहीं दी गई। 60 वर्ष से अधिक आयु के वयोवृद्ध किसानों के लिये पेंशन का कोई प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका, मितानिन, स्कूल सफाई कर्मचारी, रोजगार सहायकों के वेतनवृद्धि और उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित करने की मांग को भी अनदेखा बताया। अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों, स्कूल और महाविद्यालयों के अतिथि प्राध्यापकों के नियमितीकरण पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।
नियमित कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों के निराकरण के लिये भी बजट में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है लेकिन नई भर्तियों की कोई घोषणा नहीं की गई। सैकड़ों गांव अब भी मुख्य मार्गों से नहीं जुड़े हैं जबकि सरकार फोरलेन, सिक्स लेन, फ्लाईओवर, रेल कॉरिडोर और हवाई सेवाओं के सपने दिखा रही है। यह नीति गांवों में अंधेरा और शहरों में उजाला लाने जैसी प्रतीत होती है।
शरण सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट किसान, मजदूर, युवा, महिला और गरीब वर्ग के लिये निराशाजनक है। उन्होंने इसे हवा-हवाई दावों और झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा कि ऐसे बजट से छत्तीसगढ़ का विकसित राज्य बनने का सपना अधूरा ही रहेगा।



