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पैरों में हो रही झनझनाहट और बेचैनी को न करें नजरअंदाज, हो सकता है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का संकेत

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क्या आपको रात में बिस्तर पर लेटते ही पैरों में झनझनाहट, खिंचाव या कुछ रेंगने जैसा एहसास होता है? क्या बार-बार पैर हिलाने या थोड़ी देर टहलने से राहत मिलती है?

अगर ऐसा ही सब कुछ आपके साथ भी हो रहा है तो इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज न करें. यह समस्या रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम- Restless Legs Syndrome (RLS) हो सकती है.

यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो खासतौर पर आराम करते समय या रात में ज्यादा परेशान करती है. इस कारण व्यक्ति को बार-बार पैरों को हिलाने की तीव्र इच्छा होती है, जिससे नींद प्रभावित होती है. कई रिसर्च दावा करती हैं कि इसस समस्या का असर जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है. आइए जानते हैं इस समस्या के बारे में आसान शब्दों में.

क्यों होती है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम? Why does restless legs syndrome occur?

यह समस्या हमारे तंत्रिका तंत्र से जुड़ी होती है दिमाग में मौजूद डोपामिन नामक रसायन मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है. जब डोपामिन का संतुलन बिगड़ता है, तो पैरों में अनियंत्रित हरकत और बेचैनी होने लगती है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समस्या Parkinson’s disease से भी जुड़ सकती है, क्योंकि उस बीमारी में भी डोपामिन की कमी पाई जाती है. इसके अलावा शरीर में आयरन की कमी, न्यूरोपैथी या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं भी इसके संभावित कारण हो सकते हैं.

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं. अगर नीचे दिए गए संकेत आपको रात में या आराम करते वक्त महसूस हों, तो आपको एलर्ट होने की जरूरत है;

पैरों में झनझनाहट, जलन या रेंगने जैसा अहसास होना.

आराम की स्थिति में इस तरह के लक्षणों का बढ़ जाना.

थोड़ी देर चलने-फिरने से अस्थायी राहत मिलना.

रात के समय परेशानी का ज्यादा होना.

बार-बार पैरों को हिलाने की अनियंत्रित इच्छा.

ये लक्षण हल्के भी हो सकते हैं और कुछ लोगों में काफी गंभीर भी हो जाते हैं, इसलिए सही समय पर पहचान बेहद जरूरी है और डॉक्टर से वक्त-वक्त पर सलाह भी लेते रहें.

डॉक्टर से जरूर लें सलाह

लगातार पैरों की बेचैनी के कारण व्यक्ति को गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिल पाती, जिस कारण दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और काम में ध्यान न लग पाने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है, इसलिए अगर लक्षण बार-बार महसूस हों, तो इसे मामूली न समझें और समय रहते डॉक्टर से सलाह लें. सही जानकारी और जागरूकता से इस समस्या पर वक्त रहते काबू पाया जा सकता है, वरना देरी इसे बढ़ा सकती है और आपको किसी बड़ी परेशानी में डाल सकती है.

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