
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को बंगाल के सिलीगुड़ी में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में ममता सरकार के बर्ताव पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में आदिवासियों को जाने से रोका गया। सरकार का कोई प्रतिनिधि भी उनका स्वागत करने नहीं आया।
इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को छोटी बहन कहते हुए कहा कि लगता है वह मुझसे काफी नाराज हैं। राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज के पिछड़ेपन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिहार, बंगाल, झारखंड व ओडिशा में आदिवासी समुदाय की बहुलता है। यह समुदाय आज भी काफी पिछड़ा हुआ है।
पीएम मोदी ने बताया शर्मनाकपीएम मोदी ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था को शर्मनाक बताया हुए कहा कि यह पहले कभी नहीं हुआ। हर कोई जो डेमोक्रेसी और आदिवासी समुदायों के एम्पावरमेंट में विश्वास करता है, निराश है। राष्ट्रपति जी, जो खुद एक आदिवासी समुदाय से हैं, ने जो दर्द और पीड़ा जाहिर की है, उससे भारत के लोगों के मन में बहुत दुख है।
राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल सरकार और TMC में समझदारी आएगी।
उन्हेंने कहा कि इस घटना ने तृणमूल सरकार की गहरी गिरावट को सामने ला दिया है। एक सरकार जो अपनी मर्जी से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, वह देश के सबसे ऊंचे संवैधानिक पद – राष्ट्रपति का भी अपमान करने से नहीं हिचकिचाती।
हमारे आदिवासी भाई-बहनों द्वारा आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति का यह अपमान हमारे देश के मूल्यों और संवैधानिक लोकतंत्र का अपमान है। आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक बहुत दुखी और हैरान है।



