अक्सर हमें लगता है कि कोई बड़ी लड़ाई या बेवफाई ही रिश्ते को खत्म करती है, लेकिन असल में हमारी ही छोटी-छोटी नकारात्मक आदतें दीमक की तरह रिश्ते को अंदर से खोखला कर देती हैं।
हमारा व्यवहार अनजाने में पार्टनर को भावनात्मक रूप से दूर धकेलने लगता है। इसलिए अगर आप में भी ऐसी आदतें हैं, तो रिश्ते को बचाए रखने के लिए इनमें सुधार करना काफी जरूरी है। आइए जानें क्या हैं ये आदतें।
कंस्ट्रक्टिव फीडबैक और लगातार क्रिटिसिज्म के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है। अगर आप अपने पार्टनर के उठने-बैठने, कपड़े पहनने या काम करने के तरीके में हमेशा कमियां निकालते रहते हैं, तो वे आपके सामने असहज महसूस करने लगेंगे। इससे पार्टनर को लगने लगता है कि वह आपके लिए काफी नहीं हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कम होता है और वे आपसे बातें शेयर करना बंद कर देते हैं।
नाराजगी जाहिर करने का यह सबसे टॉक्सिक तरीका है। बहस होने पर बात करने के बजाय पूरी तरह चुप हो जाना या पार्टनर को नजरअंदाज करना इमोशनल टॉर्चर जैसा है। खुलकर बात करना किसी भी रिश्ते की ऑक्सीजन है। जब आप साइलेंट ट्रीटमेंट देते हैं, तो पार्टनर असुरक्षित महसूस करता है और दूरियां कम होने के बजाय दीवारें खड़ी हो जाती हैं।
पुरानी बातों को ढाल बनाकर आज की लड़ाई में इस्तेमाल करना एक बहुत ही बुरी आदत है। अगर आपने किसी बात के लिए पार्टनर को माफ कर दिया है, तो उसे हर झगड़े में वापस लाना विश्वास को खत्म करता है। इससे पार्टनर को महसूस होता है कि आप उन्हें बदलने का मौका नहीं दे रहे हैं और आप अभी भी पुरानी कड़वाहट को पकड़े हुए हैं।
प्यार का मतलब यह नहीं है कि पार्टनर का हर पल और हर पासवर्ड आपका हो। उनके फोन की जासूसी करना, उनके दोस्तों से मिलने पर सवाल उठाना या उन्हें मी-टाइम न देना रिश्ते में घुटन पैदा करता है। जब किसी व्यक्ति को अपनी आजादी छिनती हुई महसूस होती है, तो वह उस रिश्ते से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने लगता है। भरोसा ही रिश्ते की नींव है; अगर वह नहीं है, तो रिश्ता टिकना मुश्किल है।
अपने दोस्तों या उनके पार्टनर से अपने पार्टनर की तुलना करना उनके दिल पर गहरे घाव करती हैं। हर इंसान की अपनी खूबियां और कमियां होती हैं। तुलना करने से पार्टनर को महसूस होता है कि आप उन्हें वैसा स्वीकार नहीं कर रहे जैसे वे हैं। इससे उनके मन में आपके लिए गुस्सा पैदा होता है।



