Home ज्योतिष महानवमी आज! इस विधि से प्रसन्न होंगी सिद्धियों की देवी, बरसेगी सुख-समृद्धि

महानवमी आज! इस विधि से प्रसन्न होंगी सिद्धियों की देवी, बरसेगी सुख-समृद्धि

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चैत्र नवरात्र के नौवें यानी आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जिसे महानवमी भी कहा जाता है। पूरे विधि-विधान से मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करने से साधक को मोक्ष, पूर्णता और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। चलिए पढ़ते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, स्वरूप व मंत्र।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूपमां सिद्धिदात्री के स्वरूप की बात की जाए, तो वह शांत और मुस्कान भरे मुखमंडल से भक्तों को सुरक्षा और शांति का आशीर्वाद देती हैं। देवी सिद्धिदात्री कमल के फूल पर आसीन रहती हैं तथा सिंह की सवारी करती हैं। देवी मां की चार भुजाएं हैं। उनके एक दाहिने हाथ में गदा, दूसरे दाहिने हाथ में चक्र, एक बाएं हाथ में कमल का फूल और दूसरे बायें हाथ में शंख सुशोभित है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद बैंगनी या जामुनी वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. मां को गंगाजल से स्नान कराकर कुमकुम, रोली अर्पित करें।
  4. रात की रानी का फूल माता को प्रिय है, इसलिए पूजा में इसे जरूर अर्पित करें।
  5. मां को हलवा, पूरी, चने और नारियल का भोग लगाएं।
  6. अंत में घी का दीपक जलाकर माता की आरती करें।
  7. कन्या पूजन, हवन और मंत्रों के जाप के साथ पूजा को संपन्न करें।

मां सिद्धिदात्री के मंत्र1. ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

2. या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

3. प्रार्थना मंत्र –

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

4. ध्यान मंत्र –वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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