नई दिल्ली : नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सरकार बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ है, लेकिन देशभर में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। काठमांडू समेत कई शहरों में छात्र, राजनीतिक दल और आम नागरिक विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शन केवल सड़कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के प्रशासनिक केंद्र सिंह दरबार तक पहुंच गए हैं। यह विरोध सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दिखाता है। विरोध की एक बड़ी वजह सरकार का वह फैसला है, जिसमें भारत से 100 रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सीमा क्षेत्रों में बढ़ी नाराजगीसीमा पर रहने वाले लोगों का कहना है कि वे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत से सामान खरीदते हैं, ऐसे में यह फैसला सीधे उनकी जिंदगी पर असर डालता है। उनका आरोप है कि सरकार ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यह नीति आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है। इसी कारण इस फैसले के खिलाफ गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है।
विरोध की दूसरी बड़ी वजह छात्र संघों को लेकर सरकार का रुख है। आरोप है कि सरकार राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों को नजरअंदाज या खत्म करने की कोशिश कर रही है। छात्र नेताओं ने इसे दमनकारी रवैया बताया है और कहा है कि सरकार बातचीत करने के बजाय दबाव बना रही है।
देशभर में हजारों छात्र प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं। कई जगहों पर छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते दिखे, जिससे साफ है कि यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है।
गृह मंत्री पर आरोप, इस्तीफे की मांग तेजप्रदर्शन का एक बड़ा मुद्दा गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर लगे आरोप भी हैं। उन पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगे हैं। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरूंग कुछ विवादित कारोबार से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे हैं।
नेपाली मीडिया में भी ऐसे दस्तावेजों का जिक्र हुआ है, जिससे उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर भी लगातार प्रदर्शन जारी रखा है।



