Home आस्था खरमास में पड़ रही है चैत्र नवरात्रि,क्या पूजा-पाठ पर पड़ेगा असर…

खरमास में पड़ रही है चैत्र नवरात्रि,क्या पूजा-पाठ पर पड़ेगा असर…

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हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च (गुरुवार) से शुरू होकर 27 मार्च (शुक्रवार) तक चलेगा. इस बार नवरात्रि के दौरान खरमास भी लगा रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में खरमास को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसका नवरात्रि की पूजा पर कोई असर पड़ेगा? आइए जानते हैं कि खरमास में नवरात्रि की पूजा कैसे करें और इस दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.

क्या खरमास में नवरात्रि की पूजा करना सही है:-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. लेकिन देवी-देवताओं की पूजा, व्रत, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान करने पर कोई रोक नहीं होती. इसी वजह से नवरात्रि की पूजा, कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत रखना पूरी तरह शुभ माना जाता है. खरमास का असर इन धार्मिक कार्यों पर नहीं पड़ता है. इसलिए आप आराम से नवरात्रि के पूजा- पाठ ही नहीं किसी और प्रकार के हवन-पूजा भी इस दौरान कर सकते हैं.

कब से कब तक रहेगा खरमास:- पंचांग के अनुसार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास की शुरुआत होती है. इस दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है.

1. शुरुआत: 15 मार्च 2026, रविवार

2. समापन: 14 अप्रैल 2026, मंगलवार

क्या खरमास में नवरात्रि की पूजा करना सही है:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. लेकिन देवी-देवताओं की पूजा, व्रत, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठान करने पर कोई रोक नहीं होती. इसी वजह से नवरात्रि की पूजा, कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत रखना पूरी तरह शुभ माना जाता है. खरमास का असर इन धार्मिक कार्यों पर नहीं पड़ता है. इसलिए आप आराम से नवरात्रि के पूजा- पाठ ही नहीं किसी और प्रकार के हवन-पूजा भी इस दौरान कर सकते हैं.

नवरात्रि में क्या-क्या कर सकते हैं:- खरमास के दौरान भी भक्त पूरे विधि-विधान से नवरात्रि मना सकते हैं. इस दौरान घर में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जा सकती है.

1. मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है.

2. दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ किया जाता है.

3. व्रत रखकर सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है.

4. इन सभी धार्मिक कार्यों को करना शुभ माना जाता है.

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