एम सी बी/दुर्ग:- प्रदेश के अतिथि शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध का नया और भावनात्मक तरीका अपनाया है। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) एकजुट संघ के बैनर तले शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर संविलियन (नियमितीकरण) की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने बताया कि वे पिछले 10 से 11 वर्षों से विद्यालयों में सेवा दे रहे हैं, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनका आरोप है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें स्थायी रोजगार, समान वेतन और सम्मान नहीं मिल पाया है। संघ द्वारा जारी पोस्टर में प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें संविलियन/समायोजन, समान कार्य के लिए समान वेतन, वर्षों की सेवा का सम्मान तथा अस्थायी व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सम्मान शामिल हैं।
शिक्षकों का कहना है कि उनका यह कदम किसी प्रकार का राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि अपनी पीड़ा और निराशा को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास है। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों का समाधान नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं, इस मामले में शिक्षा विभाग या राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना शेष है। शिक्षक संगठन को उम्मीद है कि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर वर्षों से लंबित मांगों का समाधान करेगी



